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बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन कैसे बढ़ाà¤à¤‚ ? | Bache Ka Vajan Kaise Badhaye
बेबी का वेट कितना बढ़ना चाहि�
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन का सही होना कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जरूरी है?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन कैसे बढ़ाà¤à¤‚?
नवजात शिशॠका वजन बढ़ाने के उपाय | Bache ka vajan kaise badhaye
6-12 महीने के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मोटा करने के लिठकà¥à¤¯à¤¾ खिलाà¤à¤‚?
कà¥à¤¯à¤¾ करें अगर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन न बढ़ रहा हो?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन बढ़ाने संबंधी इन बातों को जरूर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखें
हर माता-पिता के लिठउनका शिशॠसबसे खास होता है। हर पल उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उसके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और वजन को लेकर चिंता बनी रहती है। à¤à¤¸à¥‡ में वह कई बार अनà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ से अपने शिशॠकी तà¥à¤²à¤¨à¤¾ करने लगते हैं। हालांकि, यह à¤à¤• आम मानवीय वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° है, लेकिन आपको यह मालूम होना चाहिठकि हर बचà¥à¤šà¤¾ दूसरे से अलग होता है। उसका विकास, वजन और बà¥à¤¨à¥‡ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दूसरों से à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में आपको बस यह देखने की जरूरत होती है कि आपका बचà¥à¤šà¤¾ चà¥à¤¸à¥à¤¤, तंदà¥à¤°à¥à¤¸à¥à¤¤ और सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ है कि नहीं। अगर आपका जवाब हां में है, तो समठलीजिठकि आपका बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤•दम ठीक है और उसका विकास सही से हो रहा है। वहीं, अगर आपका जवाब न में है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में आपको अपने बचà¥à¤šà¥‡ के खान-पान पर विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है।
बचà¥à¤šà¥‡ के वजन को बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ संबंधी उपायों को जानने से पहले जरूरी होगा कि बचà¥à¤šà¥‡ के सही वजन का आंकलन कैसे किया जाठइस तथà¥à¤¯ को अचà¥à¤›à¥‡ से समठलिया जाà¤à¥¤
बेबी का वेट कितना बढ़ना चाहि�
बचà¥à¤šà¥‡ के वजन के संबंध में बात करें, तो इसके बà¥à¤¨à¥‡ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ समय और उमà¥à¤° के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। इसे हम निमà¥à¤¨ बिंदà¥à¤“ं के माधà¥à¤¯à¤® से समठसकते हैं (1)।
पहली तिमाही में बचà¥à¤šà¥‡ का वजन हर हफà¥à¤¤à¥‡ 200 गà¥à¤°à¤¾à¤® तक बॠसकता है। वहीं, अगले तीन हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में बचà¥à¤šà¥‡ के वजन में 150 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हफà¥à¤¤à¤¾ बà¥à¥‹à¤¤à¤°à¥€ देखी जा सकती है। इसके अलावा, अगले 6 महीनों में बचà¥à¤šà¥‡ के वजन में करीब 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हफà¥à¤¤à¥‡ की दर से इजाफा हो सकता है।
सामानà¥à¤¯ विकास की बात करें, तो चौथे महीने में बचà¥à¤šà¥‡ का वजन, जनà¥à¤® के वकà¥à¤¤ के वजन का दो गà¥à¤¨à¤¾ होना चाहिà¤à¥¤ वहीं, à¤à¤• साल का पूरा होने पर बचà¥à¤šà¥‡ का वजन जनà¥à¤® के वजन का करीब तीन गà¥à¤¨à¤¾ होना चाहिà¤à¥¤ साथ ही दो साल की उमà¥à¤° तक बचà¥à¤šà¥‡ का वजन जनà¥à¤® के वजन का करीब चार गà¥à¤¨à¤¾ होना चाहिà¤à¥¤
इसके बाद छह साल की उमà¥à¤° तक बचà¥à¤šà¥‡ का वजन हर साल दो किलो तक बà¥à¤¨à¤¾ आवशà¥à¤¯à¤• है। वहीं, इसके बाद किशोर अवसà¥à¤¥à¤¾ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करने तक बचà¥à¤šà¥‡ का वजन हर साल तीन किलो तक बà¥à¤¨à¤¾ चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‡ का वजन कितना बà¥à¤¨à¤¾ चाहिà¤, यह जानने के बाद हम जानेंगे कि बचà¥à¤šà¥‡ का वजन सही होना कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जरूरी है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन का सही होना कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जरूरी है?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन ठीक होना बेहद जरूरी होता है। इसे हम निमà¥à¤¨ बिंदà¥à¤“ं के माधà¥à¤¯à¤® से बेहतर तरीके से समठसकते हैं (2) :
उमà¥à¤° के हिसाब से अनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ औसत वजन में कमी कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ है।
वजन में कमी के कारण बचà¥à¤šà¥‡ में विकास धीमा होता है और शारीरिक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ सामानà¥à¤¯ के मà¥à¤•ाबले काफी कमजोर हो जाती है।
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ में कमी के कारण बचà¥à¤šà¤¾ कई गंà¤à¥€à¤° बीमारियों की चपेट में आसानी से आ सकता है। इससे उसके बार-बार बीमार होने की आशंका à¤à¥€ बॠजाती है।
अगर इस विषय में समय रहते धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ न दिया जाà¤, तो कà¥à¤› मामलों में बचà¥à¤šà¥‡ की मौत होने का à¤à¥€ खतरा पैदा हो सकता है।
लेख के आगे के à¤à¤¾à¤— में हम आपको कà¥à¤› आसान से उपाय बताà¤à¤‚गे, जिनसे आपको बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में मदद मिल सकती है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन कैसे बढ़ाà¤à¤‚?
दैनिक दिनचरà¥à¤¯à¤¾ और खान-पान पर विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देकर बचà¥à¤šà¥‡ के वजन में सà¥à¤§à¤¾à¤° किया जा सकता है। उमà¥à¤° के आधार पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठआप कà¥à¤¯à¤¾ उपाय अपना सकते हैं, आगे हम इसी बारे में बता रहे हैं।
नवजात शिशॠका वजन बढ़ाने के उपाय
अगर आप नवजात के कम वजन से परेशान हैं, तो आपको बता दें कि इसका à¤à¤•मातà¥à¤° विकलà¥à¤ª मां का दूध ही है। विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• मां के दूध में वो सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µ और खनिज पदारà¥à¤¥ मौजूद होते हैं, जो शिशॠके बेहतर विकास के लिठजरूरी माने जाते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में बस आपको जरूरत हैं, जो बचà¥à¤šà¥‡ के हाव-à¤à¤¾à¤µ और उसकी à¤à¥‚ख को समà¤à¤¨à¥‡ की। इसके लिठआपको नवजात को लगà¤à¤— हर दो-दो घंटे में दूध पिलाना होगा। साथ ही यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करना होगा कि बचà¥à¤šà¥‡ का पेट पूरी तरह से à¤à¤°à¤¾ है या नहीं। इसके लिठआप हमेशा बचà¥à¤šà¥‡ को दोनों सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से दूध पिलाने की कोशिश करें।
इससे अलग अगर आपका बचà¥à¤šà¤¾ पà¥à¤°à¥€à¤®à¥‡à¤šà¥à¤¯à¥‹à¤° (समय से पूरà¥à¤µ) हà¥à¤† है, तो कà¥à¤› मामलों में वह मां का दूध पी पाने में असमरà¥à¤¥ होता है। à¤à¤¸à¥‡ में आप बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ पमà¥à¤ªà¤¿à¤‚ग (सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से दूध निकालने की मशीन) के माधà¥à¤¯à¤® से अपना दूध निकाल कर उसे पिला सकती हैं। वहीं, कà¥à¤› मामलों में à¤à¤¸à¤¾ à¤à¥€ संà¤à¤µ है कि सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध न उतरे। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• पिलाने की सलाह दे सकते हैं।
इन दोनों ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में आप बचà¥à¤šà¥‡ को हर दो-दो घंटे में दूध पिलाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें और यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि बचà¥à¤šà¥‡ का पेट पूरी तरह से à¤à¤° चà¥à¤•ा है। इस दौरान आपको उसके मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— पर à¤à¥€ विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना होगा। अगर नवजात दिन में 6 से 8 बार मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— करता है, तो इसका मतलब यह है कि बचà¥à¤šà¥‡ को आवशà¥à¤¯à¤• पोषण मिल रहा है ।
6-12 महीने के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मोटा करने के लिठकà¥à¤¯à¤¾ खिलाà¤à¤‚?
जनà¥à¤® के छह माह बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कई जरूरी पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, जो सिरà¥à¤« दूध पर निरà¥à¤à¤° रहने से नहीं मिल पाते। इसलिà¤, डॉकà¥à¤Ÿà¤° छह माह से बड़े बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दूध के अलावा अनाज, दाल, सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, फल और घर में बने सीरियलà¥à¤¸ खिलाने की सलाह देते हैं।
6 से 8 माह के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में आप सà¥à¤®à¥‚दी को शामिल कर सकते हैं, ताकि उसकी आंतों पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जोर न आठऔर वह इन खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को आसानी से हजम कर सके। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने वाली बात यह है कि 6 से 8 माह के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में फल पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 30 गà¥à¤°à¤¾à¤® और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 480 गà¥à¤°à¤¾à¤® से अधिक नहीं शामिल करनी चाहिà¤à¤‚। वहीं, 8 माह से बड़े बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आप नरम और मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® आहार सीधे खाने के लिठदे सकते हैं, ताकि वह खà¥à¤¦ से खाना सीखें और à¤à¥‹à¤œà¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ उनमें रà¥à¤à¤¾à¤¨ बà¥à¥‡ ।
अगर आप à¤à¥€ अपने बचà¥à¤šà¥‡ के वजन को लेकर परेशान हैं, तो हम आपको कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के बारे में बता रहे हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आप अपने बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में शामिल कर सकते हैं।
1. सेहत से à¤à¤°à¤ªà¥‚र है केला
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठकेले को à¤à¤• बेहतरीन विकलà¥à¤ª माना गया है। यह à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और फैट का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ होता है। इन तीनों ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की मौजूदगी इसे वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ का à¤à¤• उतà¥à¤¤à¤® आहार बनाती है। इसके अलावा, इसमें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और फाइबर के साथ कई जरूरी मिनरल और विटामिन à¤à¥€ मौजूद रहते हैं, जो बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में अहम à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं (4) (5)। खास यह है कि आप इसे बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में बड़ी आसानी से शामिल कर सकते हैं। सीधा इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² के साथ-साथ इसे सà¥à¤®à¥‚दी, शेक, केक या पà¥à¤¡à¤¿à¤‚ग बनाकर à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ को दिया जा सकता है।
2. वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में मददगार है रागी
कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® व आयरन के साथ फाइबर, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और विटामिन à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के विकास के लिठजरूरी हैं। इसके अलावा, à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और फैट à¤à¥€ वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में सहायक हो सकते हैं (4) (6)। पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र रागी आसानी से पच जाती है, इसलिठचिकितà¥à¤¸à¤• à¤à¥€ इसे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। बचà¥à¤šà¥‡ को खिलाने के लिठआप इसे हलवे या खिचड़ी में शामिल कर सकते हैं।
3. दही देता है जरूरी पोषण
विटामिन à¤, बी, सी, डी, ई, फोलेट और नियासिन के साथ कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, आयरन, पोटैशियम और मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® जैसे कई अनà¥à¤¯ पोषक ततà¥à¤µ दही में मौजूद होते हैं। वहीं, कम फैट के साथ अचà¥à¤›à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ में ऊरà¥à¤œà¤¾ और पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¥€ इसमें पाया जाता है। इस कारण इसे बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठसहायक माना जा सकता है (4) (7)।
4. ओटà¥à¤¸ से बà¥à¤¾à¤à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ का वजन
जहां इसमें मौजूद à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€, फैट और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤ रूप से बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में सहायक होते हैं, वहीं इसमें विटामिन बी-6, फोलेट, राइबोफà¥à¤²à¥‡à¤µà¤¿à¤¨, थियामिन और नियासिन के साथ पोटैशियम, फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की मौजूदगी बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में सहयोग करती है (4) (8)।
5. आलू बनाठतंदà¥à¤°à¥à¤¸à¥à¤¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठआप आलू को à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में ला सकती हैं। इसमें à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ व कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ के साथ कà¥à¤› मातà¥à¤°à¤¾ में फैट à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ होता है, जो वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में कारगर माना जाता है। इसके अलावा, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, आयरन, फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸ और पोटैशियम के साथ इसमें विटामिन बी-6, सी, राइबोफà¥à¤²à¥‡à¤µà¤¿à¤¨, थियामिन, नियासिन और फोलेट à¤à¥€ मौजूद होते हैं, जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पोषण में सकारातà¥à¤®à¤• परिणाम देते हैं। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में शामिल करने के लिठआप आलू का à¤à¤°à¤¤à¤¾ बनाकर या उसे उबालकर दूध में मैश करके à¤à¥€ दे सकते हैं। दाल, सबà¥à¤œà¥€ या खिचड़ी के साथ à¤à¥€ इसे इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में लाया जा सकता है (4) (9)।
6. शकà¥à¤•रकंद से बनाà¤à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत
आलू की ही तरह शकà¥à¤•रकंद को à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में शामिल करना बेहत आसान है। आप इसे उबाल कर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सीधा खाने के लिठदे सकते हैं। अगर आप चाहे तो दूध के साथ मैश करके à¤à¥€ इसे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दे सकते हैं। à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ होने के कारण इसे बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठउपयोग में लाया जा सकता है। वहीं, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, पोटैशियम, आयरन और मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® के साथ विटामिन-सी, नियासिन व फोलेट और अनà¥à¤¯ कई जरूरी विटामिन और पोषक ततà¥à¤µ à¤à¥€ इसमें à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में उपलबà¥à¤§ रहते हैं, जो बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में लाà¤à¤•ारी माने जाते हैं (4) (10)।
7. दालें हैं पोषण का खजाना
दालें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ मानी जाती हैं। साथ ही इसमें आयरन, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, जिंक और फोलेट जैसे मिनरल और कई जरूरी विटामिन पाठजाते हैं। पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ मांसपेशियों को मजबूती पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है और मिनरल व विटामिन बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ सहयोग पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। इस कारण यह कहा जा सकता है कि दालों को बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में शामिल करने से उनके बेहतर विकास में मदद मिल सकती है (4) (11)।
8. à¤à¤µà¥‹à¤•ाडो से दें जरूरी पोषण
जैसा कि हमने आपको लेख में पहले à¤à¥€ बताया है कि बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठउपयोग में लाठजाने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में फैट, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और वसा का संयोजन लाà¤à¤•ारी परिणाम देता है। ठीक वैसे ही à¤à¤µà¥‹à¤•ाडो में à¤à¥€ इन तीनों के साथ मिनरलà¥à¤¸ और विटामिन à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में उपलबà¥à¤§ होते हैं, जो बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में सहायक माने जाते हैं (4) (12)। 6 से 9 महीने तक के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इसकी पà¥à¤¯à¥‚री बनाकर दी जा सकती है। वहीं, 9 महीने से बड़े बचà¥à¤šà¥‡ को इसे मैश करके खिलाया जा सकता है।
9. अंडा है वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में मददगार
अंडा फैट, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ के साथ मिनरल और विटामिन का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ होता है। इस कारण इसे बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में शामिल करना काफी लाà¤à¤•ारी सिदà¥à¤§ हो सकता है। इससे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन तो बà¥à¤¤à¤¾ ही है, साथ ही यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को अनà¥à¤¯ जरूरी पोषक ततà¥à¤µ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है (4) (13)। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने वाली बात यह है कि कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में इसके कारण à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ à¤à¥€ हो सकती है। इसलिà¤, à¤à¤• बार अंडा देने के बाद आप तीन दिन तक इसके पड़ने वाले पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को अचà¥à¤›à¥‡ से परख लें। उसके बाद ही इसे बचà¥à¤šà¥‡ के नियमित आहार में शामिल करें। अगर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ दिखाई दें, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से तà¥à¤°à¤‚त सलाह लें।
10. पनीर का उपयोग है लाà¤à¤•ारी
पनीर कम वसा वाला à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। इसमें कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸, पोटेशियम और सोडियम के साथ अधिकतर विटामिन थोड़ी-थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में उपलबà¥à¤§ होते हैं। इस कारण यह बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में सहायक माना जा सकता है (4) (14)। पनीर के छोटे-छोटे टà¥à¤•ड़े काटकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को खाने के लिठदिठजा सकते हैं, लेकिन इसके इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में à¤à¥€ आपको तीन दिन के लिठà¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ वाला नियम पालन करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है। कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में इसका उपयोग à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ पैदा कर सकता है।
11. डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸ से बढ़ेगा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन
वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸ शामिल करना à¤à¤• उतà¥à¤¤à¤® विकलà¥à¤ª साबित हो सकता है। दरअसल, इनमें à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पाई जाती है, जो वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में सहायक होती है (4) (15)। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आप इसकी पà¥à¤¯à¥‹à¤°à¥€ या सà¥à¤®à¥‚दी बनाकर दे सकते हैं।
12. फà¥à¤°à¥‚ट जूस है सहायक
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में फà¥à¤°à¥‚ट जूस को शामिल करना à¤à¥€ वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में आपकी मदद कर सकता है। इनमें à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और शà¥à¤—र की आवशà¥à¤¯à¤• मातà¥à¤°à¤¾ पाई जाती है। वहीं, इसे मिनरल और विटामिन का à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ माना जाता है, जो बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के साथ-साथ उनके पोषण में à¤à¥€ मदद कर सकता है (4) (16)। आप 9 माह से बड़े बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गूदेदार फल सीधे खाने के लिठà¤à¥€ दे सकते हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ संबंधी जानकारी हासिल करने के बाद लेख के आगे के à¤à¤¾à¤— में हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के वजन में कमी के अनà¥à¤¯ कारणों के बारे में जानेंगे।
कà¥à¤¯à¤¾ करें अगर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन न बढ़ रहा हो?
आवशà¥à¤¯à¤• पोषण के अलावा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन कम होने के कई और कारण à¤à¥€ हो सकते हैं, जिनके बारे में आपको जानना जरूरी है। इन कारणों को हम कà¥à¤› बिंदà¥à¤“ं के माधà¥à¤¯à¤® से समà¤à¤¾à¤à¤‚गे। अगर आपको अपने शिशॠमें इसमें से कोई à¤à¥€ कारण नजर आà¤, तो तà¥à¤°à¤‚त अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें (17)।
पेट में कीड़े होने की वजह से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन कम हो सकता है।
जीन से संबंधित समसà¥à¤¯à¤¾ होने पर à¤à¥€ वजन कम होने की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ इसका à¤à¤• बड़ा कारण हो सकती है।
अंगों का विकसित न होना à¤à¥€ इस समसà¥à¤¯à¤¾ का बड़ा कारण हो सकता है।
नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® से जà¥à¥œà¥‡ विकार à¤à¥€ वजन कम होने की वजह हो सकते हैं।
à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ जैसी खून से संबंधित बीमारी à¤à¥€ इसकी वजह हो सकती है।
लेख के आगे के à¤à¤¾à¤— में हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ संबंधी कà¥à¤› जरूरी बाते बताà¤à¤‚गे, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखना जरूरी है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन बढ़ाने संबंधी इन बातों को जरूर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखें
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ संबंधी कà¥à¤› जरूरी बातों को आप नीचे दिठगठबिंदà¥à¤“ं के माधà¥à¤¯à¤® से समठसकते हैं (17)।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ माता-पिता का à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• संबंध अचà¥à¤›à¤¾ होना चाहिà¤à¥¤
माता-पिता को बचà¥à¤šà¥‡ के मूड और उसकी à¤à¥‚ख को अचà¥à¤›à¥‡ से समà¤à¤¨à¥‡ की जरूरत होती है।
बचà¥à¤šà¥‡ को इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ से बचाना चाहिठहै और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिठकि बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤¸à¥€ कोई à¤à¥€ चीज न खाठजो हानिकारक हो।
खाने के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ रूà¤à¤¾à¤¨ को बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ पर विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने की जरूरत होती है।
किसी à¤à¥€ नठआहार को देने से पहले तीन दिन उससे होने वाली à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को जरूर परख लें।
अब तो आप बचà¥à¤šà¥‡ के वजन संबंधी सà¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤• बातों को अचà¥à¤›à¥‡ से समठही गई होंगी। साथ ही आपको यह à¤à¥€ पता चल गया होगा कि किन कारणों की वजह से बचà¥à¤šà¥‡ का वजन कम हो सकता है। लेख के माधà¥à¤¯à¤® से आपको इस समसà¥à¤¯à¤¾ को दूर करने के लिठकà¥à¤› घरेलू खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ और उनके उपयोग को à¤à¥€ समà¤à¤¾à¤¯à¤¾ गया है। साथ ही कà¥à¤› जरूरी बातें à¤à¥€ बताई गई हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखना आपके लिठजरूरी है। à¤à¤¸à¥‡ में अगर आप à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के वजन को लेकर परेशान हैं, तो यह लेख आपके बड़े काम आने वाला है। इसके लिठजरूरी होगा कि लेख में दी गई सà¤à¥€ जानकारियों को पहले अचà¥à¤›à¥‡ से पà¥à¥‡à¤‚, उसके बाद दिठगठसà¥à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को अमल में लाà¤à¤‚।
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